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जन्मदिन पर समाजसेवा की अनूठी मिसाल:  डॉ. अंशुल चौहान ने DMD पीड़ित 8-10 बच्चों को दिया नया जीवन का संबल

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जन्मदिन पर समाजसेवा की अनूठी मिसाल:

 डॉ. अंशुल चौहान ने DMD पीड़ित 8-10 बच्चों को दिया नया जीवन का संबल

जिला ब्यूरो चीफ वासुदेव वाणी

​जोबट (अलीराजपुर) में डॉ. अंशुल चौहान की संवेदनशील पहल; जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने की सराहना

​जोबट। जन्मदिन के अवसर पर अक्सर लोग दिखावे और फिजूलखर्ची पर जोर देते हैं, लेकिन जोबट स्थित प्रताप मेमोरियल फैमिली क्लिनिक के डॉ. अंशुल चौहान ने एक अनुकरणीय लकीर खींची है। डॉ. चौहान ने अपना जन्मदिन उत्सव के बजाय सेवा के महायज्ञ के रूप में मनाया। उन्होंने ‘ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी’ (DMD) जैसी गंभीर और दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे 8-10 बच्चों को निःशुल्क उपचार का उपहार देकर उनके जीवन में नई उम्मीदें जगाई हैं।

​चिकित्सा शिविर:उपचार के साथ मिला मार्गदर्शन

​डॉ. चौहान द्वारा आयोजित इस विशेष शिविर में चिन्हित बच्चों का न केवल नि:शुल्क परीक्षण किया गया, बल्कि उन्हें आवश्यक थेरेपी और परामर्श भी प्रदान किया गया। इस दौरान उन्होंने केवल इलाज तक ही सीमित न रहकर, हर बच्चे की शारीरिक स्थिति के अनुरूप विशेष डाइट चार्ट भी तैयार किए, जो उनकी बीमारी के प्रबंधन और स्वास्थ्य में सुधार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होंगे।

​इसके अतिरिक्त, डॉ. चौहान ने बच्चों के माता-पिता की भी काउंसलिंग की। उन्होंने परिवारों को DMD के साथ बेहतर जीवन जीने की तकनीकें समझाईं और उन्हें इस कठिन समय में मानसिक संबल प्रदान किया।

जनप्रतिनिधियों ने की मुक्त कंठ से प्रशंसा

​इस नेक कार्य के साक्षी बनने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों का जमावड़ा लगा। कार्यक्रम में मुख्य रूप से कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान, पूर्व विधायक माधव सिंह डावर, भाजपा जिला अध्यक्ष संतोष परवाल और विधायक प्रतिनिधि गोविंद गुप्ता उपस्थित रहे।

​कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान ने डॉ. अंशुल चौहान की प्रशंसा करते हुए कहा, “डॉ. चौहान का यह प्रयास समाज के लिए एक प्रेरणा है। निस्वार्थ सेवा भाव से किसी के जीवन में खुशियां लाना ही सच्चे जन्मदिन का उत्सव है।” अन्य उपस्थित नेताओं ने भी इस पहल को स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक बड़ा और साहसी कदम बताया।

​संदेश: सेवा ही है वास्तविक खुशी

​डॉ. अंशुल चौहान का यह निर्णय समाज को यह संदेश देता है कि वास्तविक खुशी धन खर्च करने में नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने में निहित है। उन्होंने साबित कर दिया है कि एक डॉक्टर का पेशा केवल इलाज तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के प्रति संवेदना का माध्यम भी है।

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