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मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान में लापरवाही पर अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस निरीक्षण की जानकारी दर्ज नहीं करने वाले 9 अधिकारियों से मांगा स्पष्टीकरण सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के निराकरण में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर रामा के 10 अधिकारियों को नोटिस

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मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान में लापरवाही पर अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस

निरीक्षण की जानकारी दर्ज नहीं करने वाले 9 अधिकारियों से मांगा स्पष्टीकरण

सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के निराकरण में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर रामा के 10 अधिकारियों को नोटिस

रणवीर सिंह सिसोदिया ब्यूरो चीफ 

झाबुआ, मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन एवं शासन की मंशानुसार आमजन की समस्याओं तथा सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों का त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा लगातार समीक्षा की जा रही है। अभियान के तहत निर्धारित दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही एवं अपेक्षित प्रगति नहीं पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी कर तीन दिवस में स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

निरीक्षण की जानकारी गूगल शीट में दर्ज नहीं करने पर 9 अधिकारियों को नोटिस

मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के नोडल अधिकारी द्वारा निर्देशित किए जाने के उपरांत भी 21 अगस्त 2026 को किए गए निरीक्षण से संबंधित जानकारी निर्धारित गूगल शीट में दर्ज नहीं करने पर 9 अधिकारियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है।

इनमें श्री राकेश भयडिया, सहायक संचालक, हाथकरघा झाबुआ; श्री मनोहर वसुनिया, प्रभारी अधीक्षण अभियंता, PIU झाबुआ; श्री सचिन चौहान, नापतौल झाबुआ; श्री जगदीश सिसोदिया, जिला प्रौढ़ शिक्षा अधिकारी झाबुआ; श्री आरजु इकबाल खान, महाप्रबंधक (GMCCB) झाबुआ; श्री नरेन्द्र मोहिते, राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक, झाबुआ; श्री अमित गोढ़, प्रबंधक, नागरिक आपूर्ति निगम (DM नान) झाबुआ; श्री शुभम बसे, नोडल वेयर हाउस झाबुआ तथा श्रीमती कृष्णा रावत, जिला प्रबंधक, कौशल उन्नयन एवं रोजगार, NRLM झाबुआ शामिल हैं।

संबंधित अधिकारियों को जारी सूचना पत्र में उल्लेख किया गया है कि नोडल अधिकारी द्वारा निर्देशित किए जाने के बावजूद निरीक्षण संबंधी जानकारी दर्ज नहीं करना वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना है तथा मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 एवं 3(क) का उल्लंघन है। अधिकारियों से पूछा गया है कि उक्त कृत्य के लिए उनके विरुद्ध मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के प्रावधानों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न प्रस्तावित की जाए।

सभी संबंधित अधिकारियों को अपना प्रतिउत्तर तीन दिवस के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित समयावधि में जवाब प्राप्त नहीं होने अथवा जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी।

रामा विकासखंड में सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के निराकरण की प्रगति असंतोषजनक

इसी प्रकार मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत 21 अगस्त 2026 को विकासखंड रामा में निर्धारित भ्रमण रोस्टर के अनुसार आयोजित कार्यक्रमों के दौरान प्राप्त एवं पूर्व से लंबित सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के निराकरण की समीक्षा की गई। समीक्षा में विभिन्न विभागों की शिकायतों के निराकरण की प्रगति अपेक्षानुरूप नहीं पाए जाने पर 10 अधिकारियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है।

इनमें तहसीलदार रामा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत रामा, खण्ड चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रामा, खण्ड शिक्षा अधिकारी रामा, थाना प्रभारी कालीदेवी, सहायक यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग झाबुआ, बाल विकास परियोजना अधिकारी रामा, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी खाद्य विभाग रामा, कनिष्ठ अभियंता ऊर्जा विभाग पारा तथा खण्ड स्रोत समन्वयक (BRCC) रामा शामिल हैं।

सूचना पत्र में उल्लेख किया गया है कि शासन की मंशानुसार मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान के तहत निर्धारित भ्रमण रोस्टर के अनुरूप कार्यक्रम आयोजित कर आमजन की समस्याओं एवं सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों का त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण किया जाना प्राथमिक उद्देश्य है। 21 अगस्त को रामा विकासखंड में अभियान की प्रगति की समीक्षा के दौरान संबंधित अधिकारियों के क्षेत्राधिकार एवं विभागों में प्राप्त तथा पूर्व से लंबित शिकायतों के निराकरण की प्रगति अत्यंत कम एवं असंतोषजनक पाई गई।

सायं 4 बजे तक प्राप्त प्रगति रिपोर्ट में भी शिकायतों का अपेक्षानुसार निराकरण नहीं पाया गया, जबकि शासन की मंशानुसार लंबित शिकायतों के शत-प्रतिशत निराकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अधिकारियों की उदासीनता एवं शिथिलता के कारण आमजन को समस्याओं का सामना करने के साथ ही शासन के महत्वपूर्ण अभियान के लक्ष्यों की प्राप्ति भी प्रभावित होना पाया गया।

संबंधित अधिकारियों को तीन दिवस के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित अवधि में संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं होने अथवा प्रस्तुत जवाब असंतोषजनक पाए जाने की स्थिति में संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार एकपक्षीय अनुशासनात्मक/दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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