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जावरा-उज्जैन ग्रीनफील्ड में मुआवजे को लेकर केरवासा के किसानों ने जताया विरोध मुआवजे में भेदभाव का आरोप, मौके पर पहुंचे जावरा तहसीलदार

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रतलाम मध्यप्रदेश

जिला संवाददाता दीपक सोनी

जावरा-उज्जैन ग्रीनफील्ड में मुआवजे को लेकर केरवासा के किसानों ने जताया विरोध

मुआवजे में भेदभाव का आरोप, मौके पर पहुंचे जावरा तहसीलदार

जावरा तहसील के ग्राम केरवासा के प्रभावित किसानों ने जावरा-उज्जैन ग्रीनफील्ड परियोजना के लिए किए जा रहे भू-अर्जन में मुआवजा राशि को लेकर विरोध जताया। किसानों का आरोप है कि ग्राम केरवासा के प्रभावित किसानों को आसपास के अन्य गांवों की तुलना में कम मुआवजा निर्धारित किया गया है। किसानों ने प्रशासन से मामले में पुनर्विचार कर न्यायोचित मुआवजा दिए जाने की मांग की है।

किसानों के अनुसार जावरा तहसील के 10 से अधिक गांव इस भू-अर्जन प्रक्रिया से प्रभावित हैं। ग्राम केरवासा का अवॉर्ड 28 अगस्त 2025 को पारित किया गया था, जबकि धारा 37 की सूचना का प्रकाशन 29 जून 2026 को किया गया। किसानों ने सवाल उठाया कि अवॉर्ड पारित होने के बाद धारा 37 की सूचना प्रकाशित करने में करीब 10 माह का अंतर क्यों रहा।

वहीं ग्राम उपलाई, उनखेड़ी, डोडियाना और उदियाखेड़ी के अवॉर्ड 20 फरवरी 2026 को पारित किए गए तथा धारा 37 की सूचना 12 मई 2026 को प्रकाशित की गई। इसी प्रकार ललियाना, हनुमंतिया और रैवास गांवों के अवॉर्ड 6 अप्रैल 2026 को पारित हुए और इनकी धारा 37 की सूचना 12 मई 2026 को प्रकाशित की गई। किसानों का कहना है कि इन गांवों के कुछ किसानों को मुआवजा राशि का वितरण भी किया जा चुका है।

मुआवजा निर्धारण को लेकर किसानों ने उठाए सवाल

किसानों के अनुसार ग्राम केरवासा के 10 किसानों की कुल 3.965 हेक्टेयर भूमि के लिए ₹13.20 लाख प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा निर्धारित किया गया है। किसानों का आरोप है कि इसमें कलेक्टर गाइडलाइन/रजिस्ट्री दर को आधार बनाया गया, जबकि बाजार मूल्य, क्रय-विक्रय के आंकड़े, क्लस्टर पद्धति अथवा आसपास के गांवों की अधिकतम रजिस्ट्री दर जैसे मापदंडों का लाभ नहीं मिला।

किसानों ने ग्राम उनखेड़ी का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां कलेक्टर गाइडलाइन ₹8.80 लाख प्रति हेक्टेयर होने के बावजूद पिछले तीन वर्षों के विक्रय पत्रों के औसत बाजार मूल्य के आधार पर करीब ₹36.52 लाख प्रति हेक्टेयर मुआवजा निर्धारित किया गया है।

दो पड़ोसी गांवों के मुआवजे में अंतर का मुद्दा

किसानों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार—

– ग्राम उनखेड़ी: कलेक्टर गाइडलाइन ₹8.80 लाख/हेक्टेयर, मुआवजा करीब ₹36.52 लाख/हेक्टेयर।

– ग्राम केरवासा: कलेक्टर गाइडलाइन ₹13.20 लाख/हेक्टेयर, मुआवजा ₹13.20 लाख/हेक्टेयर।

किसानों का कहना है कि दोनों गांव पड़ोसी होने के बावजूद मुआवजा निर्धारण में इतना बड़ा अंतर समझ से परे है। उनका दावा है कि परियोजना के आसपास के 15 से 20 किलोमीटर के क्षेत्र में अन्य प्रभावित गांवों में भी करीब ₹36.52 लाख प्रति हेक्टेयर के आसपास मुआवजा निर्धारित किया गया है।

किसानों ने यह भी बताया कि रतलाम जिले में दिल्ली-मुंबई 8 लेन एक्सप्रेस-वे के निर्माण के बाद आसपास के क्षेत्रों के बाजार मूल्यों में वृद्धि हुई है। इसी आधार पर उनका कहना है कि भू-अर्जन के दौरान वर्तमान बाजार परिस्थितियों और पिछले वर्षों के वास्तविक विक्रय मूल्यों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

खड़ी सोयाबीन फसल के बीच निर्माण कार्य को लेकर भी चिंता

किसानों ने बताया कि वर्तमान में उनके खेतों में सोयाबीन की फसल खड़ी है। मुआवजे को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने तथा वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से लिखित आश्वासन नहीं मिलने के बावजूद निर्माणाधीन कंपनी द्वारा किसानों पर दबाव बनाए जाने की बात कही गई है।

किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि मुआवजा निर्धारण की प्रक्रिया की पुनः समीक्षा की जाए और प्रभावित किसानों के साथ समान एवं न्यायोचित व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।

विरोध की सूचना मिलने पर जावरा तहसीलदार मौके पर पहुंचे और किसानों से चर्चा की। किसानों ने अपनी मांगों एवं मुआवजा निर्धारण से संबंधित आपत्तियां प्रशासन के समक्ष रखीं।

किसानों द्वारा लगाए गए आरोपों और प्रस्तुत आंकड़ों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि समाचार लिखे जाने तक नहीं हो सकी है। प्रशासन का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जा सकता है।

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