स्व. श्री आर.एन. जैन सा. को मरणोपरांत “नवकार आराधक रत्न” की उपाधि से किया अलंकृत
77 वर्ष के धर्ममय जीवन, अखंड नवकार आराधना, भक्तामर साधना एवं जीवदया के प्रति समर्पण को किया नमन
रणवीर सिंह सिसोदिया ब्यूरो चीफ
झाबुआ। स्थानीय जैन श्वेतांबर तीर्थ श्री ऋषभदेव बावन जिनालय झाबुआ श्री संघ के वरिष्ठ संरक्षक, नियमित भक्तामर साधक, नवकार आराधक एवं जीवदया के प्रति समर्पित रहे स्व. श्री आर.एन. जैन सा. (रामनारायण जी जैन) को उनके धर्ममय जीवन, आध्यात्मिक साधना एवं समाजसेवा के उत्कृष्ट योगदान के लिए मरणोपरांत “नवकार आराधक रत्न” की उपाधि से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर धर्मसभा में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके पुण्य एवं प्रेरणादायी जीवन का स्मरण किया गया।
स्व. श्री आर.एन. जैन सा. ने अपने 77 वर्ष के यशस्वी जीवन में धर्म एवं आध्यात्मिक साधना को सदैव सर्वोच्च स्थान दिया। वे नियमित रूप से भक्तामर स्तोत्र का पाठ करते थे तथा नवकार महामंत्र के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा थी। इसके साथ ही जीवदया, धार्मिक आराधना एवं सामाजिक सेवा के अनेक कार्यों में भी उनका उल्लेखनीय योगदान रहा।
श्री संघ के रिंकु रूनवाल ने बताया कि पुण्य सम्राट श्रीमद् विजय जयंतसेन सुरीश्वर जी महाराज साहेब की पावन निश्रा में स्व. श्री जैन सा. ने लगातार 20 वर्षों तक अखंड रूप से नव दिवसीय नवकार मंत्र आराधना पूर्ण की। साथ ही विगत 15 वर्षों से बावन जिनालय में आयोजित भक्तामर स्तोत्र के पाठ में नियमित रूप से सहभागी रहे। उन्होंने जीवनभर अनेक तप, जप एवं धार्मिक आराधनाओं के माध्यम से अपनी आध्यात्मिक साधना को निरंतर आगे बढ़ाया।
“नवकार की आराधना आत्मशुद्धि का श्रेष्ठ माध्यम”
इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए विदुषी साध्वी श्री अविचलदृष्टा श्री जी म.सा. ने कहा कि नवकार महामंत्र की आराधना आत्मशुद्धि का श्रेष्ठ माध्यम है। नवकार मंत्र की आराधना एवं जाप से जीव अपने भीतर सकारात्मक आध्यात्मिक भावों का विकास करता है और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ता है। जिस जीव के हृदय में नवकार महामंत्र के प्रति श्रद्धा स्थापित हो जाती है, उसका जीवन धर्ममय बनता है और वह आत्मचिंतन तथा मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होता है।
उन्होंने कहा कि स्व. श्री आर.एन. जैन सा. का जीवन नियमित नवकार आराधना, भक्तामर साधना एवं जीवदया जैसे गुणों से प्रेरणादायी रहा। उनका जीवन समाज को धर्म के प्रति निष्ठा, नियमित आराधना, आत्मचिंतन एवं सेवा की प्रेरणा देता रहेगा।
“नवकार आराधक रत्न” को भावांजलि
स्व. श्री आर.एन. जैन सा. को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए जैन श्वेतांबर श्री संघ के अध्यक्ष संजय मेहता, हस्तीमल संघवी श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ से पूर्वेश कटारिया, वरिष्ठ उपाध्यक्ष तेजप्रकाश कोठारी, अनिल राठौर, नरेंद्र संघवी, मुकेश लोढ़ा, समाजसेवी यशवंत भंडारी, परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकेश नाकोड़ा, सचिव रत्नदीप सकलेचा , अन्तिम जैन राजेश मेहता कोषाध्यक्ष उल्लास जैन सुभाष कोठारी , भरत बाबेल ,राजेन्द्र रूनवाल रमेश छाजेड antm व्यापारी संघ से औ.एल. मोगरा सहित समाज के अनेक गणमान्यजनों ने भावांजलि अर्पित की।
धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं ने स्व. श्री आर.एन. जैन सा. के धर्ममय जीवन को स्मरण करते हुए कहा कि “नवकार आराधक रत्न” की उपाधि उनके वर्षों की साधना, धर्मनिष्ठा, नियमित आराधना एवं आत्मकल्याण के प्रति समर्पण को दी गई एक सार्थक एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि है।
स्व. श्री आर.एन. जैन सा. का जीवन आने वाली पीढ़ियों को नियमित भक्तामर पाठ, नवकार महामंत्र की आराधना, जीवदया, तप-जप एवं धार्मिक सेवा के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा। उनका धर्ममय जीवन समाज के लिए एक ऐसी प्रेरणादायी विरासत है, जिसे लंबे समय तक स्मरण किया जाता रहेगा।





