संस्कार और संस्कृति का अद्भुत संगम: गंगा दशहरा पर जोबट में तीन पीढ़ियों ने एक साथ किया महायज्ञ का संचालन
जिला ब्यूरो चीफ वासुदेव वाणी
जोबट। गंगा दशहरा का पावन पर्व जोबट स्थित गायत्री शक्तिपीठ पर एक गौरवशाली इतिहास का साक्षी बना। यहाँ आयोजित नव कुंडिया गायत्री महायज्ञ में श्रद्धा और संस्कारों की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली, जिसने न केवल श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का एक नया अध्याय लिख दिया। इस महायज्ञ का संचालन एक ही परिवार की तीन पीढ़ियों ने संयुक्त रूप से व्यास पीठ पर बैठकर किया।
संस्कारों की विरासत: सोनी परिवार का अनुकरणीय समर्पण
यह गौरवशाली अवसर स्वर्गीय जगन्नाथ जी सोनी के परिवार को प्राप्त हुआ। स्वर्गीय सोनी ने अपना संपूर्ण जीवन पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी के विचारों और गायत्री परिवार की सेवा में समर्पित किया था। उन्होंने अपने बच्चों और पोतों में जो आध्यात्मिक संस्कार सींचे थे, वे आज इस महायज्ञ के रूप में फलीभूत होते दिखे।
तीन पीढ़ियों का अनूठा समन्वय
महायज्ञ के सफल संचालन में तीन पीढ़ियों की सहभागिता रही:
(1)प्रथम पीढ़ी: राजेंद्र जी सोनी (वानप्रस्थी), जिन्होंने अपने पिता के आदर्शों को आत्मसात करते हुए संपूर्ण परिवार को गायत्री परिवार की सेवा से जोड़ा।

(2)द्वितीय पीढ़ी: आशीष जी सोनी, जिन्होंने अपने पिता के मार्गदर्शन में यज्ञ के कर्मकांडों में कुशल सहयोग प्रदान किया।
(3) तृतीय पीढ़ी: सानिध्य सोनी, जिन्होंने युवा अवस्था में ही अपनी प्रखर निष्ठा का परिचय देते हुए व्यास पीठ की गरिमा को नई ऊंचाइयां दीं।
प्रेरणा बना सोनी परिवार
गंगा दशहरा के शुभ अवसर पर जब दादा, पुत्र और पौत्र को एक साथ व्यास पीठ पर विराजमान देखा, तो पूरा परिसर भक्तिमय हो गया। उपस्थित प्रबुद्धजनों और गायत्री साधकों ने एकमत होकर कहा कि आज के दौर में, जब संयुक्त परिवार और पारंपरिक संस्कार लुप्त हो रहे हैं, तब सोनी परिवार का यह दृष्टांत समाज के लिए प्रकाश पुंज के समान है।

यह आयोजन इस सत्य को सिद्ध करता है कि यदि संस्कारों की जड़ें मजबूत हों, तो पीढ़ी-दर-पीढ़ी संस्कृति का प्रवाह न केवल अक्षुण्ण रहता है, बल्कि और अधिक समृद्ध भी होता है। गायत्री शक्तिपीठ के साधकों ने इस आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बताते हुए सोनी परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया




